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"अपनापन' एक ऐसी आत्मीय और प्रेरणादायी कृति है, जिसमें श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न भूमिकाओं में देखे, सीखे और आत्मसात् किए गए अनुभवों का सजीव संकलन प्रस्तुत किया गया है। श्री चौहान ने तीन दशकों से भी अधिक समय तक मोदीजी को विभिन्न भूमिकाओं में निकट से देखा है, और उनसे सीखा है-जब दोनों भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता थे, जब वे अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री थे, जब वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री थे और आज जब वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री हैं। यह पुस्तक उन मूल्यों, दृष्टिकोण और कार्यशैली को भी अभिव्यक्त करती है, जिन्हें उन्होंने इस दीर्घ सहयात्रा में आत्मसात् किया।
यह केवल घटनाओं-मात्र का विवरण नहीं, बल्कि एक विचार-यात्रा है- जहाँ संगठन, समर्पण और संदेश के माध्यम से नेतृत्व, सेवा और राष्ट्र-निर्माण के सूत्र उभरकर सामने आते हैं। 'सेवा', 'अंत्योदय', 'जन भागीदारी', 'राष्ट्र प्रथम' और 'लोक कल्याण' जैसे मूलमंत्र पुस्तक के केंद्र में हैं, जो न केवल गवर्नेस की दिशा तय करते हैं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा भी देते हैं।
यह कृति पाठकों को बताती है कि कैसे दृढ़ संकल्प, स्पष्ट दृष्टि और निरंतर परिश्रम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। 'अपनापन' एक नेता के साथ बिताए गए पलों का संग्रह ही नहीं, बल्कि उन मूल्यों का दर्पण है, जो राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।"
जन्म :जयीछपरा, माँझी, सारण, (बिहार) में।
शिक्षा :एम.ए. (अंग्रेजी), एम.ए. (हिंदी), एल-एल.बी., पी-एच.डी.।
व्याख्याता (अंग्रेजी), प्रशासनिक सेवा में बिहार सरकार के संयुक्त सचिव के पद से अवकाश प्राप्त।
कृतित्व : ‘सुबह के सितारे’, ‘नदी प्यासी’ (काव्य-संकलन), ‘सागर मथा कितनी बार’, ‘अंजुरी में सप्तसागर’ (प्रेमगीत संकलन), ‘हाँ, मेरे मालिक’, ‘मैं हूँ नचिकेता’, ‘यह कविता नहीं है’ (राजनीतिक व्यंग्य कविता संकलन), ‘हिंदी कविता में मिथक की भूमिका’ (काव्यालोचन), ‘कुरुक्षेत्र में कवि’, ‘दि आर्यन क्वेश्चन (प्राचीन इतिहास), ‘विचारधारा का सच’, ‘द्रोणाचार्य’ (महाकाव्यात्मक उपन्यास), ‘डर से न लिखी कभी डायरी’ (गद्य गीतिलता), ‘गौतम गाथा (महाकाव्यात्मक उपन्यास), ‘दैट ग्लोरियस ह्वायस’ (अंग्रेजी काव्य-संग्रह), ‘चाणक्य, तुम लौट आओ’ (ऐतिहासिक उपन्यास), ‘सात समुंदर पार’ (प्रेमगीत) तथा ‘हस्तिनापुर किसका’ (व्यंग्य विचार कविताएँ)। राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में सतत लेखन। आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से प्रसारण।
सम्मान-पुरस्कार :‘साहित्य विभूषण’, ‘विशिष्ट सेवा सम्मान’, ‘महाकवि राकेश शिखर सम्मान’, ‘सोहनलाल द्विवेदी सम्मान’, ‘अखिल भारतीय अंबिका प्रसाद ‘दिव्य प्रतिष्ठा पुरस्कार’ बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का ‘फणीश्वरनाथ रेणु सम्मान, एवं अन्य अनेक सम्मान प्राप्त।